भारत की धरती उत्सवों की धरती है यहां हर त्योहार सिर्फ रस्में निभाने का माध्यम नहीं होता है बल्कि उसमें जीवन जीने की एक राह छिपी होती है। ऐसा ही एक पावन पर्व है देव दीपावली जिसे देवताओं की दीपावली कहा जाता है यह त्योहार वाराणसी काशी की पहचान बन चुका है और जो भी इसे एक बार देख लेता है वो जीवनभर उस नज़ारे को भूल नहीं पाता है देव दीपावली क्या है? देव दीपावली हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है यानी दीपावली के ठीक 15 दिन बाद मान्यता है कि इसी दिन देवता स्वयं स्वर्ग से उतरकर काशी में गंगा तट पर दीप जलाकर भगवान शिव की पूजा करते हैं काशी की गलियां, घाट और मंदिर लाखों दीयों से जगमग हो उठते हैं ऐसा लगता है जैसे गंगा खुद सुनहरी साड़ी पहनकर मुस्कुरा रही हो इस दृश्य को देखने के लिए देश- विदेश से श्रद्धालु आते हैं